December 2005
Monthly Archive
डांग के पांच राजाओं द्वारा शबरीकुंभ में सहयोग का वचन
डांग के सुबीर गाँव में दिनांक 11-10-2005 को आयोजित एक पत्रकार परिषद में शबरीकुंभ समारंभ समिती के अध्यक्ष किशोरभाई गावित ने जानकारी देते हुये बताया कि स्वतंत्रता के पश्चात भी वर्षे से पिछड़ा हुआ जीवन यापन करते वनवासी बंधुओं का सामाजिक तथा आर्थिक विकास करने के उद्देश्य से आगामी 11, 12, 13 फरवरी, 2006 को शबरी कुंभ समारंभ समिती द्वारा डांग जिले के पंपा सरोवर स्थान पर एक भव्य व विशाल शबरी कुंभ का आयोजन हो रहा है । जिसमें गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, गोवा विदर्भ सहित समग्र देश में से लगभग 5 लाख व्यक्ति हिस्सा लेंगे ।
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शरद पोर्णिमा
माता शबरी जन्मतिथी
आज कोजागिरी पोर्णिमा ! आजच्या दिवशी कोऽजार्गति? कोऽजार्गति? म्हणजे कोण जागे आहे ?, कोण जागृत त आहे? असे विचारीत दुर्गा देवी सर्वत्र फिरते असे म्हणतात. नवरात्राचे नऊ दिवस शक्ति बुध्दिच्या दैवताचे आराधान करावे. विजया दशमीला विजय संपादनासाठी सीमोल्लंघन करावे. त्यानंतर येणारी ही पोर्णिमा ! शेतीची कामे अर्ध्यावर झालेली, शेतातील पिके वाऱ्यावर डोलू लागलेली, चार महिन्यांचा पावसाळा संपत आलेला. काही भागात नवीन पिके हाताशी आलेली आहेत. अनेक भागातील ही नवात्र पोर्णिमा!
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डांग की घटनाओं की वास्तविकता
26 दिसंबर 1998 से गुजरात राज्य का डांग जिला समाचार पत्रों की सुर्खियों में रहा है। इन घटनाओं की पृष्ठभूमि और इसके मूल कारणों से सर्व सामान्य लोग आज भी अधिक परिचित नही है।
जिले मे कुल आबादी 1.50 लाख है,जिसमे से 95 प्रतिशत वनवासी है। दक्षिण गुजरात में महाराष्ट्र राज्य की सीमा से लगता हुआ यह जिला 312 गांवो का है। आजादी के समय इस जिले में 500 ईसाई थे जो आज बढकर 40 हजार हो गये है। धर्मान्तरणकी यह तुफानी गति गत दो दशको मे विशेष रूप से बढी है। इसके कारण अनेकों पारिवारिक समस्याएं खडी हुई है। सांस्कृतिक पहचान का संकट ख़डा हुआ है।
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The Kumbh Mela is described as the largest congregation of the faithful. It is simply amazing that in the absence of any formal invitation or announcement, millions and millions of pilgrims congregate every three years at the appointed date and have a holy dip to cleanse their sins. The original aim of the Kumbh included defence of the Hindu society and deliberate upon the challenges facing it. Even today, the sadhus carry their traditional weapons to the Kumbh. Unfortunately, the social significance of the Kumbh has been largely forgotten with time. The Shabarikumbh is a step towards rekindling the social significance of the Kumbh Mela.
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A huge kumbh (religious gathering) of Hindus is on the cards on February 11, 12 and 13, 2006. Named Shabrikumbh it promises to be an unprecedented assembly of awakened Hindus. The Kumbh will be the culmination of sustained efforts towards awakening the Hindus in general and the vanavasi Hindus in the Dang region of Gujarat in particular.
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