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श्री शबरीकुंभ समारोह

एक विहंगावलोकन

पू.श्री मोरारीबापू के शुभाशीर्वाद तथा मार्गदर्शन के अनुसार डांग जिले के शबरीधाम क्षेत्र में होने जा रही शबरीकुंभ मेले की तैयारी पूरे जोरों के साथ चल रही है। सभी कार्य़कर्ता और स्वयंसेवकों के परिश्रम से यह तैयारी अंतिम चरण में पहुंच गयी है। इस समिति में सारे भारतवर्ष से सदस्यों का चयन किया गया है। समिति के अध्यक्ष पद पर सूरत के श्री कैलाशजी शर्मा का नाम सुनिश्चित किया गया है। समिति के महामंत्री पद पर डांग के आहवा नगर के श्री किशोरभाई गावित और सह महामंत्री पद पर उदयपुर,राजस्थान के श्री सुरेशजी कुलकर्णी का चयन किया गया है।

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शबरीकुंभ: एक परिचय

पितृआज्ञा का पालन करने हेतु भगवान राम वनवासी बने। दंडकारण्य स्थित पंचवटी में आकर रावण ने सीतामाता का अपहरण किया। सीताजी की खोज में निकले श्रीराम और लक्ष्मण एक दिन माता शबरी की झोंपडी पर पधारे। वर्षो से भगवान राम केआगमन की प्रतिक्षा कर रही शबरीमाता के घर में जैसे स्वर्ण-सूर्योदय हुआ। शबरीमाता ने अपने हर्षाश्रु से प्रभु चरणों का अभिषेक किया। प्रभु श्रीराम के आगमन और शबरीमाता की भक्ति से यह भूमि धन्य हो गई।

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श्री शबरीधाम यात्रा माहात्म्य

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सम्पूर्ण विश्व में अपनी पवित्र भारतभूमि को कर्मभूमि एवं मोक्षभूमि कहा गया है। जगत के अन्य देश अपनी अपनी भूमि को भोगभूमि मानते हैं। भूमि के प्रति भारत एवं अन्य देशों की सोच में यही महत्वपूर्ण अन्तर है। यह भारतभूमि अनेक ऋषि मुनियों की तपस्थली है। अनेक महापुरूषों की जन्मभूमि है। यहाँ का बच्चा बच्चा राम है, यहां का कंकर कंकर शंकर है। यहाँ तो स्वयं परमेश्वर को जन्म लेने की इच्छा होती है।
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डांग के पांच राजाओं द्वारा शबरीकुंभ में सहयोग का वचन

डांग के सुबीर गाँव में दिनांक 11-10-2005 को आयोजित एक पत्रकार परिषद में शबरीकुंभ समारंभ समिती के अध्यक्ष किशोरभाई गावित ने जानकारी देते हुये बताया कि स्वतंत्रता के पश्चात भी वर्षे से पिछड़ा हुआ जीवन यापन करते वनवासी बंधुओं का सामाजिक तथा आर्थिक विकास करने के उद्देश्य से आगामी 11, 12, 13 फरवरी, 2006 को शबरी कुंभ समारंभ समिती द्वारा डांग जिले के पंपा सरोवर स्थान पर एक भव्य व विशाल शबरी कुंभ का आयोजन हो रहा है । जिसमें गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, गोवा विदर्भ सहित समग्र देश में से लगभग 5 लाख व्यक्ति हिस्सा लेंगे ।
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डांग की घटनाओं की वास्तविकता

26 दिसंबर 1998 से गुजरात राज्य का डांग जिला समाचार पत्रों की सुर्खियों में रहा है। इन घटनाओं की पृष्ठभूमि और इसके मूल कारणों से सर्व सामान्य लोग आज भी अधिक परिचित नही है।

जिले मे कुल आबादी 1.50 लाख है,जिसमे से 95 प्रतिशत वनवासी है। दक्षिण गुजरात में महाराष्ट्र राज्य की सीमा से लगता हुआ यह जिला 312 गांवो का है। आजादी के समय इस जिले में 500 ईसाई थे जो आज बढकर 40 हजार हो गये है। धर्मान्तरणकी यह तुफानी गति गत दो दशको मे विशेष रूप से बढी है। इसके कारण अनेकों पारिवारिक समस्याएं खडी हुई है। सांस्कृतिक पहचान का संकट ख़डा हुआ है।
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