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डांग के पांच राजाओं द्वारा शबरीकुंभ में सहयोग का वचन

डांग के सुबीर गाँव में दिनांक 11-10-2005 को आयोजित एक पत्रकार परिषद में शबरीकुंभ समारंभ समिती के अध्यक्ष किशोरभाई गावित ने जानकारी देते हुये बताया कि स्वतंत्रता के पश्चात भी वर्षे से पिछड़ा हुआ जीवन यापन करते वनवासी बंधुओं का सामाजिक तथा आर्थिक विकास करने के उद्देश्य से आगामी 11, 12, 13 फरवरी, 2006 को शबरी कुंभ समारंभ समिती द्वारा डांग जिले के पंपा सरोवर स्थान पर एक भव्य व विशाल शबरी कुंभ का आयोजन हो रहा है । जिसमें गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, गोवा विदर्भ सहित समग्र देश में से लगभग 5 लाख व्यक्ति हिस्सा लेंगे ।

गरीब किसानों का हित ध्यान में रखते हुये अक्टूबर माह के स्थान पर फरवरी माह में कुंभ मेले का आयोजन कर किसानों की कीमती फसल को बचला लिया गया है । जिससे किसान वर्ग प्रसन्न है । किशोरभाई गावित के अनुसार कुंभ मेले के विषम में अपप्रचार करने वालों का हेतु एकमात्र राजकीय लाभ लेना है । कुंभ मेले के आयोजन के कारण ही नदी में चेक डेम का निर्माण किया गया जिससे इस क्षेत्र का जलस्तर ऊचाँ आया है जिसका साधा लाभ स्थानिक प्रजा को हो रहा है । इस अवसर पर शबरीकुंभ समारंभ के मंत्री श्री फुलचन्दभाई ने आदिवासिओं की विशिष्ट भाषा में बताया कि शबरीधाम में शबरीकुंभ मेले के आयोजन की प्रेरणा का श्रेय पूज्य श्री मोरारी बापु को जाता है । सन 2002 के अक्टूबर माह में शरदपूर्णिमा के दिन आहवा से 33 कि.मी. की दूरी पर शबरीधाम में एक पहाड़ी पर शबरीमाता के मंदिर का निर्माण कर माता शबरी तथा श्री रामलक्ष्मण की मूर्ति प्रतिष्ठा की गयी तथा प्रसिध्द रामायण कथाकार पु. श्री मोरारीबापु द्वारा रामायण कथा का आयोजन किया गया, जिसका 50,000 से अधिक वनवासिओं द्वारा लाभ लिया गया । वनवासिओं की दयनीय स्थिती देख श्री मोरारीबापु का हृदय द्रवित हो गया, उनके मुख से निकला कि वनवासिओं के उत्थान तथा डाँग के लगभग 311 गाँवो के विकास के लिये एक कुंभ मेले का आयोजन होना चाहिए, इन शब्दों को शबरी कुंभ समारंभ समिति द्वारा पुरा करने का संकल्प किया गया।

इस अवसर पर शबरी कुंभ व्यवस्थापक समिति के सुरेशराव कुलकर्णी ने जानकारी दी कि कुंभ मेले के आयोजन से क्षेत्र के विकास के साथ स्थानीय प्रजा में भी जागृति आयेगी । इस अवसर पर समिति के ट्रस्टी श्री गोपालभाई ने बताया कि कुंभ मेले के आयोजन से वनवासी बंधुओं की जमीन, खेती, वृक्षों अथवा पर्यावरण को हानि नहीं होगी ।

शबरीकुंभ जैसे वनवासिओं के उत्सव में राजकीय उद्देश्य से प्रेरित तत्त्वों द्वारा जो भ्रामक प्रचार किया जा रहा है उसका हाँग के पाँचो राजाओं व वनवासी समाज ने योग्य उत्तर दिया है । डाँग के शबरी धाम में दिनांक 11-10-2005 को शबरीकुंभ समारंभ समिती द्वारा आयोजित एक सभा में स्थानीय वनवासी बंधुओ, डाँग के पाँचो राजाओं तथा नवनायकों सहित सभी ने शबरीकुंभ मेले के आयोजन के विषय में चल रहे अपप्रचार की एक आवाज में भर्त्सना की है । शबरी धाम के शबरीकुंभ मेले के आयोजन में विक्षेप डालकर येनकेन प्रकारेन मेले का आयोजन रोकने का दुष्कृत्य करनेवाले कुछ राजकीय पार्टिओ के प्रतिनिधिओं के प्रयत्नों की तीव्र भर्त्सना करते हुये डांग जिले के पांचो राजाओं ने समग्र वनवासी प्रजा की ओर से कुंभ मेले को अपना समर्थन व्यक्त किया गया । इस सभा में पांचो राजाओं ने शबरी कुंभ में संमति देकर प्रजा को एक संदेश दिया, उन्होंने एक आवाज में शबरीकुंभ को सहयोग करने तथा भ्रामक प्रचार पर ध्यान नही देने को कहा ।

इस अवसर पर डांग के दहेर के राजा तपतराव पवार ने कहा, कि प्रजा में कुछ भ्रांति उत्पन्न हुई थी वह दूर हो गई है अत: अब कोई समस्या नहीं आयेगी । इस से पहले कुछ लोगों द्वारा समाज को तोड़ने की प्रवृत्ति प्रारंभ हुई थी, प्रजा में आक्रोश फैलाने के हेतु से यह दुष्प्रचार किया गया कि कुंभ के बहाने सरकार जमीन पर कब्जा कर लेगी, वृक्ष काटे जायेगें, बीमारी फैलेगी तथा पर्यावरण को भारी नुकसान होगा । इस अवसर पर पत्रकारों से बातचीत में वर्सुला के राजपुत्र श्री धनराजसिंह पवार ने स्वयं को शबरीमाता का वंशज तथा भगवान श्री राम को आराध्य देव बताया । उन्होंने कहा कि कुंभ मेले का आयोजन समग्र वनवासी समाज के लिये गौरव की बात है । इस समारंभ में डांग के राजपरिवार से तपतराव पवार (दहेर), करणसिंह राव (गाढ़वी), त्रिकमराव पवार (पिंपरी), धनराजसिंह( राजकुमार वर्सुला), भंवरसिंह सूर्यवंशी (लिंगा) को भगवा पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया गया । इस सभा में राजाओं द्वारा कहा गया कि वे स्वयं शबरी कुंभ से प्रभावित हैं ताकि उन्होंने शबरीकुंभ मेले में अपना पूर्ण सहयोग देने की बात कही ।

इस कुंभ मेले में मात्र गुजरात से ही नहीं अपितु महाराष्ट्र, राजस्थान, गोवा, विदर्भ से लगभग पांच हजार सेवाभावी लोग सेवा देंगे । इस मेले में प्रतिदिन लगभग दो लाख लोग आयेंगे ऐसा अनुमान है, इन लोगों के लिये चालीस नगर तैयार किये जायेंगे।
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Courtesy:
गुजरात पत्रिका, विश्व संवाद केन्द्र, अहमदाबाद, गुजरात.
संपादिका : विद्या पसारी E-mail : info[at]vskgujarat[dot]com
दिनांक : 14 अक्टूबर, 2005

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