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शबरीकुंभ: एक परिचय

पितृआज्ञा का पालन करने हेतु भगवान राम वनवासी बने। दंडकारण्य स्थित पंचवटी में आकर रावण ने सीतामाता का अपहरण किया। सीताजी की खोज में निकले श्रीराम और लक्ष्मण एक दिन माता शबरी की झोंपडी पर पधारे। वर्षो से भगवान राम केआगमन की प्रतिक्षा कर रही शबरीमाता के घर में जैसे स्वर्ण-सूर्योदय हुआ। शबरीमाता ने अपने हर्षाश्रु से प्रभु चरणों का अभिषेक किया। प्रभु श्रीराम के आगमन और शबरीमाता की भक्ति से यह भूमि धन्य हो गई।


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